28 May 2016

क्या कोई देश अपने पुरखों को ऐसे याद करता है?

क्या कोई देश अपने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को ऐसे याद करता है? जवाहरलाल नेहरु सिर्फ देश के पहले प्रधानमंत्री नहीं थे. वो गांधीजी के बाद आज़ादी की लड़ाई के सबसे बड़े महानायक भी थे. यह बात सिर्फ नेहरूवादी नहीं कहते बल्कि हर कोई कहता है जिसे आज़ादी की लड़ाई की थोड़ी-सी भी समझ है. अपने तमाम अनुयायियों में से गांधीजी ने नेहरूजी को अपना वारिस चुना. सरदार पटेल ने गांधीजी की हत्या के बाद बार-बार नेहरुजी को अपना नेता कहा जबकि सरदार पटेल नेहरुजी से उम्र और अनुभव में काफी बड़े थे. क्रांतिकारी राष्ट्रवादी जैसे चन्द्रशेखर आज़ाद और भगत सिंह हमेशा नेहरूजी की बहुत इज्ज़त करते थे. आज़ादी के पहले के समाजवादी नेता नेहरुजी की सलाह के बगैर कोई काम नहीं करते थे. नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के साथ नेहरूजी की जोड़ी युवा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के दिल की धड़कन थी. 


(नेहरूजी की पुण्यतिथि पर राष्ट्रीय आन्दोलन फ्रंट द्वारा वितरित पर्चे की प्रति )

नेहरूजी ने अपनी जिंदगी का तकरीबन एक दशक अंग्रेजों की जेलों में बिताया, अंग्रेजों की लाठियाँ खाईं, मोतीलाल नेहरु के समय का सारा वैभव त्याग दिया और इलाहबाद का आनंद भवन कांग्रेस को दान में दे दिया. आज़ादी के बाद उन्होंने पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया और विश्व नेता के रूप में देखे जाने लगे. आज का भारत जो कुछ भी है उसकी बुनियाद में जवाहरलाल नेहरु हैं. उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को ऐसा आधार दिया जिस पर आज भारत दुनिया की सबसे समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं में खड़ा हो सका है. 

आप चाहें तो उनकी कुछ नीतियों (जैसे कश्मीर आदि) की आराम से आलोचना कर सकते हैं. लेकिन उनके व्यक्तित्व के बारे में इन्टरनेट पर असम्मानजनक बातें फ़ैलाना कहाँ तक जायज है. उनकी तस्वीरों के साथ भद्दे तरीके से छेड़छाड़ करके उन्हें अश्लील, कामुक और कामांध दिखाने वाले लोग कौन हैं? क्या ऐसे लोगों का पता लगाना और उन्हें रोकना सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं है? ख़ास तौर पर तब जब हाल ही में कर्नाटक पुलिस ने एक व्यक्ति को वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी की फोटोशॉप की हुयी फोटो अपने फेसबुक पेज पर लगाने के जुर्म में जेल भेज दिया हो. अगर वर्तमान प्रधानमन्त्री की बेइज्ज़ती पर पुलिस कार्यवाही की जा सकती है तो पूर्व प्रधानमंत्री की बेइज्ज़ती पर क्यों नहीं? वह भी तब जब वह प्रधानमंत्री अपना बचाव करने के लिए जीवित नहीं है. नीचे एक फोटो के माध्यम से (जिसमें पहली नकली है और दूसरी असली) हम आपसे अपील करते हैं कि सरकार चाहे कोई कार्यवाही करे या न करे आप इस तरह के दुष्प्रचार से दूर रहें, उसे नज़रंदाज़ करें और हो सके तो उसका विरोध करें. क्योंकि जो लोग अपने पुरखों को इज्ज़त नहीं दे सकते, आने वाली पीढ़ियों से बेइज्ज़ती सहने के लिए तैयार रहें. क्योंकि हम जो सलूक अपने पुरखों के साथ कर रहे हैं, आने वाली पीढियाँ यही सीखकर हमारे साथ सलूक करेंगी.

राष्ट्रीय आन्दोलन फ्रंट 
(आज़ादी की लड़ाई के मूल्यों के प्रचार-प्रसार को समर्पित संगठन)
7042220925, 9990645060, 9868325191

24 May 2016

मोदी जी, गांधी-नेहरू को अय्याश बतानेवाले कब जेल जाएंगे?

नीरेंद्र नागर24 मई, 2016नवभारत टाइम्स 


हाल ही में कर्नाटक पुलिस ने एक व्यक्ति को जेल में डाल दिया क्योंकि उसने आपकी एक फ़ोटोशॉप्ट इमेज को अपने फेसबुक पेज पर लगाया था। बहुत ही घटिया हरकत थी। आपको उस ‘देशद्रोही’ ओवैसी के पैर छूते दिखाया गया था। अच्छा किया आपकी पार्टी ने जिसने उसकी शिकायत की और उसे पकड़वाया। लेकिन मेरी आपसे प्रार्थना है कि आप और आपकी पार्टी पहले ज़रा उन लोगों की ख़बर भी लें जो विपक्षी नेताओं की ऐसी ही तस्वीरें सोशल मीडिया पर लगा रहे हैं। ऐसी ही एक तस्वीर मुझे नवभारत टाइम्स के एक पाठक रूपेश कुमार ने भेजी। देखिए, फ़ोटो में क्या किया हुआ और क्या लिखा हुआ है।

Sonia Bar girl Fake Photo
यह दरअसल मेरिलिन मनरो की मशहूर तस्वीर है जिसमें मनरो के चेहरे पर सोनिया गांधी का चेहरा लगाया हुआ है। नीचे देखें असली तस्वीर। दोनों तस्वीरों में चेहरे के अलावा सबकुछ समान है।
Screen Shot 2016-05-17 at 4.56.18 PM
हमने हाल ही में एक ब्लॉग लगाया है जिसमें उन तमाम लोगों के प्रोफ़ाइल हैं जिन्होंने यह फ़ोटो अपनी वॉल पर लगाया है। देखें ब्लॉग, ‘डांस बार की तस्वीर’ में दिख रही महिला ‘सोनिया गांधी’? इस ब्लॉग में उन सभी लोगों में से कुछ के नाम और प्रोफ़ाइल है जिन्होंने इसे पोस्ट या शेयर किया। तो क्या आपकी पार्टी और आपकी सरकार ऐसे सभी लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगी जिन्होंने ऐसी तस्वीरें पोस्ट की हैं?
चलिए, सोनिया को हम छोड़ देते हैं क्योंकि वह फ़िरंगी हैं और उस कांग्रेस पार्टी को बचाने की कोशिश कर रही हैं जिसकी स्थापना भी एक फ़िरंगी ने ही की थी और जिस कांग्रेस से आप देश को मुक्त कराना चाह रहे हैं लेकिन देशद्रोहियों की वजह से मुक्त नहीं करा पा रहे हैं। (देखिए, दिल्ली के निगम चुनाव में चार खानग्रेसी फिर से चुन कर आ गए।) तो सोनिया को आपके मित्र और भक्त कुछ भी कहें, ताड़का या पूतना, सब जायज़ है। आख़िर उन्होंने भी तो आपको मौत का सौदागर कहा था। वैसे भी वह कोई पीएम तो रही नहीं हैं जो उनकी परवाह की जाए। हां, पीएम का मामला हो तो उनका सम्मान ज़रूर होना चाहिए जैसा कि आपके पार्टी सांसद विजय गोयल भी कहते हैं।
Vijay Goel Poster
चलिए, अब मैं नीचे देश के प्रथम प्रधानमंत्री की एक तस्वीर लगा रहा हूं। मैं जानता हूं कि आप इस व्यक्ति से बहुत नफ़रत करते हैं और आपके भक्त तो आपसे ज़्यादा नफ़रत करते हैं, लेकिन मेरी प्रार्थना है कि आप प्लीज़, एक बार मिचमिची आंखों से ही सही, यह फ़ोटो देख लें क्योंकि नहीं देखेंगे तो मामला ठीक से समझ नहीं आएगा। नीचे देश के पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू कुछ विदेशी लड़कियों के साथ नज़र आ रहे हैं। फ़ोटो पर लिखे मैटर को अवश्य पढ़िएगा। यदि नहीं पढ़ा जा रहा हो तो मैं पढ़ देता हूं – कितनी हवस थी उन आंखों में कि कुत्ता भी शरमा जाए। स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ते हुए आखिर कमीनेपन की भी हद होती है।
Nehru with chorus girls Fake
जिसने भी यह तस्वीर लगाई है, उसने सच ही कहा है कि कमीनेपन की भी हद होती है क्योंकि यह तस्वीर बनाते समय उसने उस कमीनेपन की सारी हदें पार कर दी थीं। इस तस्वीर पर नेहरू का फ़ोटो चिपकाया गया है जैसे कि आपके वाले फ़ोटो में आडवाणी की जगह ओवैसी का फ़ोटो चिपकाया गया था और जिस कारण आप और आपकी पार्टी को  बहुत ग़ुस्सा आया और वह बंदा आज जेल में है। देखिए नीचे असली तस्वीर।
Chorus Girls origninal
चलिए, नेहरू को भी छोड़ देते हैं। ऐसे लोग बदनाम किए जाने लायक़ ही हैं जिन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों की दुहाई देते हुए जम्मू -कश्मीर में जनमतसंग्रह कराने का वादा कर दिया। ऐसे राज’नैतिक‘ मूर्खों के साथ जो भी हो, कम है। ठीक है ना? लेकिन गांधीजी को तो आप बहुत मानते हैं। राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान आपने गांधीजी के जन्मदिन से ही शुरू किया था। उसके लोगो में गांधीजी का चश्मा भी लगवा दिया है। तो गुजरात के तृतीय गौरव (पहले तो आप हैं, दूसरे वल्लभभाई पटेल और उसके बाद ही बापू का नाम आता है) का अपमान हो, यह तो आप नहीं बर्दाश्त करेंगे ना। चलिए, नीचे उनकी भी तस्वीर दिखा देता हूं।
Gandhi and a Girl Fakeदेखा आपने, फ़ोटो में कैसे बापू एक नटखट बाला के साथ नकसट का खेल खेल रहे हैं। लेकिन मोदी जी, यह भी नक़ली है। असली तस्वीर में वह पं. नेहरू (फिर से उनका नाम आ गया, सॉरी) के साथ हंस-बोल रहे हैं। है न ग़लत बात? नेहरू और सोनिया तक तो ठीक था। मगर बापू के साथ ऐसी अभद्रता। लानत है। उम्मीद है, आपको भी यह तस्वीर देखकर बहुत ग़ुस्सा आया होगा और ऐसे लोगों को कल ही जेल में डलवा देंगे जिन्होंने ये फ़ोटो शेयर किया है।
Gandhi and Nehruअब मैं एक ऐसा राज़ बताता हूं जो मुझे पक्का यक़ीन है कि आपको मालूम नहीं होगा। वह यह कि आपके भक्त लोग आपका ही नक़ली फ़ोटो बनाकर धड़ाधड़ चला रहे हैं। बोल रहे हैं कि मोदीजी पहले आरएसएस के दफ़्तर में झाड़ू लगाते थे। देखिए, नीचे की तस्वीर।
Modi Jhadoo green Fakeकुछ याद आया? नहीं ना? आएगा भी कैसे? आपने RSS के दफ़्तर में कभी झाड़ू थोड़े ही न लगाया था। लेकिन आपके ये भक्त जब आप 2014 में इलेक्शन के प्रचार में व्यस्त थे, तब यही तस्वीर फेसबुक में चिपका-चिपकाकर जनता को बता रहे थे कि मोदीजी कितना ज़मीन से जुड़े हुए हैं। अब ज़मीन से जुड़ा होने का मतलब यह थोड़े ही है कि आदमी जमीने पे बैठ जाए और झाड़ू लगाने लगे।
मुझे तो पहले ही शक था। और भी कुछ लोगों को शक था। आप बिज़ी थे, इसलिए आपको डिस्टर्ब नहीं किया। ख़ुद ही जांच की तो पता चला कि फ़ोटो तो किसी रमुआ का था, उस पर उन्होंने आपकी मुंडी चिपका दी।
Jhadoo originalऔर जानते हैं, इस फ़ोटो से एक और गड़बड़ हो गई जिसका आपको और आपकी पार्टी को शायद पता ही न हो। इस फ़ोटो से आपका तो प्रचार हुआ सो हुआ, झाड़ू का भी ख़्वाह-मख़ाह प्रचार हो गया। आगे चलकर दिल्ली विधानसभा चुनाव में लोगों ने यह समझकर झाड़ू पर बटन दबा दिया कि वे आपको वोट दे रहे हैं। लेकिन आपको वोट देने के चक्कर में वे ‘आप’ को वोट दे बैठे। अब ऐसे नासमझ भक्तों पर तो आपको कार्रवाई करनी ही चाहिए जिन्होंने आपके हाथ में झाड़ू पकड़ाया और ‘आप’ को दिल्ली में बहुमत दिलवाया। अगर यह झाड़ूवाली तस्वीर इतनी शेयर न होती तो केजरीवाल के पास आज दिल्ली की चेयर न होती।
चलिए, जाते-जाते अपने भक्तों के कुछ और कमाल दिखाता हूं। वैसे तो ‘भक्त अनंत, फोटुशॉपवा अनंता’ का मामला है। फिर भी दो–चार आपको दिखा ही देता हूं। आपके भक्तों ने ही चिपकाई है। कहां से कॉपी–पेस्ट किया है, वह भी बता देता हूं ताकि आपको भी तसल्ली हो जाए।
यह पहली तस्वीर आपके किसी हरियाणवी भक्त ने शेयर की है जो गुजरात से प्रेरणा लेकर नया हरियाणा बनाना चाहते हैं। अक्षर छोटे हैं, शायद मोबाइल पर पढ़ न पाएं। इसलिए फिर से लिख देता हूं। लिखा है –आखिर बुलेट ट्रेन ट्राइअल के लिए हिंदुस्तान आ ही गई। इस तस्वीर में ट्रेन बालिमोरिया स्टेशन गुजरात में देखी जा सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र जी को शत-शत प्रणाम।
Bullet Train India Fake
असलियत नीचे देखें। वही स्टेशन, वही प्लैटफ़ॉर्म, वही लोग। लेकिन ट्रेन?
Bullet Train Original
और यह वही लड़की है जो आपकी इतनी बड़ी फ़ैन हो गई है कि पीठ पर आपकी तस्वीर ही उकेरवा दी। आपने भी देखी होगी यह लड़की हालांकि यह पता नहीं चला कि क्या वह सरे बाज़ार नंगी पीठ ही घूमती थी!
Girl with Modi Tattoo
लेकिन असलियत तो कुछ और है।
Girl with orignail tattooआप यह फ़ोटो इस साइट पर देख सकते हैं – http://tattooinsights.blogspot.in/2011/08/angel-tattoo-designs.html
और यह देखिए, आप किस शान से शेरनियों के साथ चल रहे हैं। चेहरे पर डर का नामोनिशान तक नहीं है। बल्कि मुझे तो शेरनियों के चेहरों पर ख़ौफ़ नज़र आ रहा है। वैसे भी उन्होंने आपके भक्तों के फ़ेसबुक पेजों पर पढ़ा-सुना होगा कि आप बचपन में मगरमच्छों से खेलते आए हैं। आपको तो याद ही होगा यह फ़ोटो कब खींचा गया था?  नहीं याद आ रहा? आएगा भी कैसे, यह तो अपने माल्या साहब के किंगफ़िशर कैलंडर का फ़ोटो है। लड़की हटाकर आपको चिपका दिया गया है।
Modi with lions fakeModi with Lion original Kingfisher calendar
और ये लो, ओबामा आपसे मिन्नत कर रहे हैं कि थोड़ा ज्ञान अमेरिका को भी दे दो ताकि वह भी भारत की तरह डिवेलप कर सके लेकिन आप उन्हें बिल्कुल तवज्जो नहीं दे रहे। क्या इस्टाइल है! लेकिन अरे, यहां भी फ़ोटोशॉप है। ये तो ओबामा और मिशेल का फ़ोटो है और मिशेल को हटाकर आपको चिपका दिया है।
obama with Modi fakeObama with michel
तो मोदी जी, इंटरनेट के महाजंगल में ऐसी बहुत सी तस्वीरें हैं – आपकी भी और आपके विरोधियों की भी। आपके विरोधी तो जो कर रहे हैं, वह आप जानते ही हैं और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई भी कर रहे हैं। लेकिन आपके भक्त जो कर रहे हैं, वह शायद आपको पता न हो। इसीलिए आज मैंने ऐसी कुछ मिसालें दी हैं जो आपके भक्तों की कलाकारी के बेहतरीन नमूने हैं। ऐसे भक्त जिन्होंने मान लिया है कि ‘फ़र्ज़ी’वाड़ा ही सबसे बड़ा ‘फ़र्ज़’ है। ऐसे भक्त जिनका नारा है – तुम एक फ़ोटोशॉप पकड़ोगे, हम सौ-सौ नए बनाएंगे। आपसे उम्मीद है कि पहले आप अपने फ़ोटोशॉपियों को रोकेंगे और उसके बाद आपियों और कांगियों पर कार्रवाई करेंगे।
पिछले ब्लॉग की तरह फिर से गांधीजी का हवाला दे रहा हूं। आज वह होते और उनके भक्त ऐसा काम कर रहे होते तो वह पहले उनको ही रोकते। हो सकता है, वे इसी बात पर अनशन कर बैठते कि जब तक यह झूठा प्रचार बंद नहीं होता, मैं अन्नजल ग्रहण नहीं करूंगा।
वैसे मैं यह सब आपको क्यों बता रहा हूं? जब आपने ‘एंटायर पॉलिटिकल साइंस’ में प्रथम श्रेणी में एमए किया है तो गांधीजी के बारे में तो ‘एंटायर बातें’ पता ही होंगी। मुझे उम्मीद है कि आप तब के गांधी और अब के गांधी – दोनों की प्रतिष्ठा को आंच न आए, इसका ख़्याल रखेंगे। और नेहरू के बारे में इतना ही कहूंगा कि देश के पहले, दूसरे और सभी प्रधानमंत्रियों की उतनी ही इज़्ज़त होनी चाहिए जितनी देश के मौजूदा प्रधानमंत्री की है। ईसा मसीह बहुत पहले कह गए हैं – दूसरों के साथ वैसा व्यवहार करो जैसा तुम अपने प्रति चाहते हो। यदि आप नेहरू और कांग्रेस को लगातार अपमानित, लांछित और उपेक्षित करेंगे यह कहकर कि साठ सालों में देश में कुछ नहीं हुआ तो आपके समर्थक भी वैसा ही दोहराएंगे और बदले में नेहरू और कांग्रेस को चाहनेवाले भी आपके साथ वैसा ही व्यवहार करेंगे यह कहकर कि दो सालों में देश में कुछ नहीं हुआ। आगे भी वे आपके काम को स्वीकार नहीं करेंगे। मोदी जी, अविश्वास और विद्वेष की राजनीति को समाप्त करना है तो पहल आपको ही करनी होगी क्योंकि आप देश के प्रधानमंत्री हैं और अपने ही शब्दों में देश के प्रथम सेवक।
देश के प्रथम सेवक के तौर पर आपको मानना होगा कि कांग्रेस और सभी पार्टियों का देश के विकास में (चाहे जितना हुआ हो)  योगदान रहा है और सभी के सहयोग से ही देश चलेगा। आपको बार-बार ऐसा कहना होगा ताकि लोगों में चाहे वे भक्त हों या अभक्त, यह संदेश जाए कि गांधी, नेहरू, पटेल, तिलक, आंबेडकर, सुभाष आदि सबके सब अपने समय के महानायक थे और हमें इन सबका सम्मान करना चाहिए।
यदि आप ऐसा करेंगे तो यह आपसी दुष्प्रचार रुकेगा या कुछ तो कम अवश्य होगा। नहीं करेंगे तो कीचड़ उछालने का यह दोतरफ़ा खेल ऐसे ही चलता रहेगा और हमारे जैसे लोगों की शिकायत बनी रहेगी कि आप विरोधियों पर तो क़ानून की तलवार चलवाते हैं मगर अपने लोगों के जालसाज़ियों पर आंख मूंद लेते हैं।

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